Monday, 19 December 2011

भ्रष्टाचार का आचार



नमस्कार दोस्तों आज कल हमरे देश में १ आचार बोहत  ही बीमारी  फैला रहा   है! इस को बनाने  वाले नहीं खाते पर हाँ डकर जरुर लेते है! में बात कर राहों  भ्रष्टाचार वाले  आचार की जो आज पुरे देश में मिल रा है कई प्रकार का खेल से हो या सुरक्षा समंदी या स्वस्थ्य से गिना ही मुस्किल है दो चार हो तो गिने यानि की बाज़ार में आचार का मेला लगा हो आर दिन समाचर पत्रों में या न्यूज़ चैनलों में पड़ने और सुने को मिलता है! क्या यही है आम आदमी मत दान का फल उनका भरोसे  का परिणाम  जो हर दिन गोटालो के रूप में परोसा जरा है! और हम बस  भ्रष्टाचार के आचार को चक रहे है!

भ्रष्टाचार का  आचार
या आचार नहीं भ्रष्टाचार है

राजनीती के गले का हर है !
या सरकार का अत्याचार है
इस से पूरा  देश बीमार है!
नेता हमारा  माला माल है
जनता हमारी   बेहाल है  या तो हमरे मत का इनाम है
फिर बी मेरा भारत महान है
क्या कहे डी डी ९९ नेता  बेमन है

Wednesday, 23 November 2011

दस साल कू घरबार

वीरों की जन्म भूमी देवतों कू धाम
उत्तराखंड उत्तरांचल दुई प्यार नाम
दस साल पूरा  होणा कू संगती चमकी गम
हरे क्रष्ण हरे क्रष्ण हरे  हरे राम !


पांच  मंत्री दुई  चुनाव दुई  सरकार
दस साल कू यु छान तों कू  घरबार

यनु काना राज पट अपड़ा तहों का ठाट बाट
जनता क थें घटा ना बटा छोड़ीं छें अध् बाट,